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श्लोक  7.54.37-38h 
यद्येवमेतत् कर्तव्यं मया न स्याद् विना प्रभो॥ ३७॥
तवाज्ञा मूर्ध्नि मे न्यस्ता यत् ते वक्ष्यामि तच्छृणु।
 
 
अनुवाद
प्रभु! यदि यह कार्य मेरे बिना नहीं हो सकता, तो मैंने आपकी आज्ञा स्वीकार कर ली है, किन्तु इसके विषय में जो कुछ मैं आपसे कहूँ, उसे आप ध्यानपूर्वक सुनें।
 
Prabhu! If this work cannot be done without me, then I have accepted your command, but please listen (carefully) to whatever I tell you about it. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)