Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.54.37-38h: प्रभु! यदि यह कार्य मेरे बिना नहीं हो सकता, तो मैंने आपकी आज्ञा स्वीकार कर ली है, किन्तु इसके विषय में जो कुछ मैं आपसे कहूँ, उसे आप ध्यानपूर्वक सुनें। | mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्येवमेतत् कर्तव्यं मया न स्याद् विना प्रभो॥ ३७॥
तवाज्ञा मूर्ध्नि मे न्यस्ता यत् ते वक्ष्यामि तच्छृणु।
अनुवाद
प्रभु! यदि यह कार्य मेरे बिना नहीं हो सकता, तो मैंने आपकी आज्ञा स्वीकार कर ली है, किन्तु इसके विषय में जो कुछ मैं आपसे कहूँ, उसे आप ध्यानपूर्वक सुनें।
Prabhu! If this work cannot be done without me, then I have accepted your command, but please listen (carefully) to whatever I tell you about it. 37 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥