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mahabharat 7.54.36-37h: महाराज! उनके ऐसा कहने पर मृत्यु ने हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर ब्रह्माजी को प्रसन्न करके पुनः यह वचन कहा -॥36 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  7.54.36-37h 
सैवमुक्ता महाराज कृताञ्जलिरिदं विभुम्॥ ३६॥
पुनरेवाब्रवीद् वाक्यं प्रसाद्य शिरसा तदा।
 
 
अनुवाद
महाराज! उनके ऐसा कहने पर मृत्यु ने हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर ब्रह्माजी को प्रसन्न करके पुनः यह वचन कहा -॥36 1/2॥
 
Maharaj! On his saying this, Mrityu, with folded hands and bowed her head and pleased Lord Brahma, then again said these words -॥ 36 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)