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mahabharat 7.54.34: इसलिए कल्याणी! तुम चार श्रेणियों में विभाजित समस्त जीवों का संहार करो। सनातन धर्म तुम्हें सब प्रकार से पवित्र रखेगा। 34॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.54.34 
तस्मात् संहर कल्याणि प्रजा: सर्वाश्चतुर्विधा:।
धर्म: सनातनश्च त्वां सर्वथा पावयिष्यति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इसलिए कल्याणी! तुम चार श्रेणियों में विभाजित समस्त जीवों का संहार करो। सनातन धर्म तुम्हें सब प्रकार से पवित्र रखेगा। 34॥
 
That's why Kalyani! You kill all the living beings divided into four categories. Sanatan Dharma will keep you pure in every way. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)