vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार
»
श्लोक 29
श्लोक
7.54.29
मृत्यो किमिदमत्यन्तं तपांसि चरसीति ह।
ततोऽब्रवीत् पुनर्मृत्युर्भगवन्तं पितामहम्॥ २९॥
अनुवाद
हे मृत्यु! तू इतना कठोर तप क्यों कर रहा है?’ तब मृत्यु ने पुनः भगवान पितामह से इस प्रकार कहा-॥29॥
Death! Why are you performing such severe penance?' Then Mrityu again said to Lord Pitamah like this - ॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×