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mahabharat 7.54.26: तदनन्तर उन्होंने पुष्कर, गोकर्ण, नैमिषारण्य और मलयाचल नामक तीर्थों में निवास करके अपने हृदय को प्रिय नियमों का पालन करते हुए अपने शरीर को क्षीण कर लिया ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.54.26 
पुष्करेष्वथ गोकर्णे नैमिषे मलये तथा।
अपाकर्षत् स्वकं देहं नियमैर्मानसप्रियै:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर उन्होंने पुष्कर, गोकर्ण, नैमिषारण्य और मलयाचल नामक तीर्थों में निवास करके अपने हृदय को प्रिय नियमों का पालन करते हुए अपने शरीर को क्षीण कर लिया ॥26॥
 
Subsequently, by staying in the holy places of Pushkar, Gokarna, Naimisharanya and Malayachal, he emaciated his body by following rules that were dear to his heart. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)