श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.54.23 
पञ्चगङ्गासु सा पुण्या कन्या वेतसकेषु च।
तपोविशेषैर्बहुभि: कर्षयद् देहमात्मन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उस पवित्र कन्या ने पंचगंगा और वेतसवन में विभिन्न तपस्याएँ करके अपने शरीर को बहुत दुर्बल कर लिया।
 
That holy girl weakened her body considerably by performing various austerities at Panchaganga and Vetasavana. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)