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mahabharat 7.54.19: नरेश्वर! तत्पश्चात् वह पुनः एक पैर पर खड़ी होकर इक्कीस पद्म वर्षों तक तप करती रही ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.54.19 
ततस्त्वेकेन पादेन पुनरन्यानि सप्त वै।
तस्थौ पद्मानि षट् चैव सप्त चैकं च पार्थिव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! तत्पश्चात् वह पुनः एक पैर पर खड़ी होकर इक्कीस पद्म वर्षों तक तप करती रही ॥19॥
 
Nareshwar! After that, she again continued to do penance by standing on one leg for another twenty-one Padma years. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)