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mahabharat 7.54.16: राजा ! उस समय मृत्यु प्रजा को मारने की प्रतिज्ञा किए बिना ही वहाँ से चली गई और बड़ी शीघ्रता से धेनुकाश्रम में पहुँची ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.54.16 
अपसृत्याप्रतिश्रुत्य प्रजासंहरणं तदा।
त्वरमाणा च राजेन्द्र मृत्युर्धेनुकमभ्यगात्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजा ! उस समय मृत्यु प्रजा को मारने की प्रतिज्ञा किए बिना ही वहाँ से चली गई और बड़ी शीघ्रता से धेनुकाश्रम में पहुँची ॥16॥
 
King! At that time Death left the place without making any promise of killing the people and in great haste reached Dhenukashram.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)