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श्लोक  7.54.11 
भविता त्वेतदेवं हि नैतज्जात्वन्यथा भवेत्।
भव त्वनिन्दिता लोके कुरुष्व वचनं मम॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ऐसा ही चलता रहेगा। इसमें कभी कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। संसार में तुम्हारी बदनामी नहीं होनी चाहिए, मेरी आज्ञा का पालन करो। 11.
 
This is how things are going to be. There can never be any change in this. You should not be defamed in the world, follow my orders. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)