श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना  »  श्लोक d1h-20
 
 
श्लोक  7.53.d1h-20 
तामाहूय तदा देवो लोकादिनिधनेश्वर:।
(उक्तवान् मधुरं वाक्यं सान्त्वयित्वा पुन: पुन:।)
मृत्यो इति महीपाल जहि चेमा: प्रजा इति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महीपाल! उस समय समस्त लोकों के, आदि और अन्त के स्वामी ब्रह्माजी ने उस स्त्री को अपने पास बुलाकर बार-बार सान्त्वना दी और मधुर वाणी में ‘मृत्यु’ कहकर पुकारा और कहा - ‘तुम इन सब लोगों का नाश कर दो।
 
Mahipal! At that time Brahma, the Lord of all the worlds, the beginning and the end, called that woman near him and consoled her again and again and called her in a sweet voice saying 'Mrityo' (Oh death) and said - 'You destroy all these people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)