vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना
»
श्लोक 7
श्लोक
7.53.7
तव प्रसादाद् भगवन्निदं वर्तेत् त्रिधा जगत्।
अनागतमतीतं च यच्च सम्प्रति वर्तते॥ ७॥
अनुवाद
हे प्रभु! आपकी कृपा से यह जगत् भूत, भविष्य और वर्तमान - इन तीन रूपों में विभक्त हो जाता है॥7॥
Lord! By your grace this world gets divided into three forms – past, future and present. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×