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mahabharat 7.53.6: रुद्र बोले- हे वसुधा के स्वामी पितामह! आप क्रोधित न हों। प्रसन्न होकर संसार का विनाश रोकें। इन स्थावर-जंगम प्राणियों का विनाश न करें।   |   mahabharat अध्याय 7.53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.53.6 
रुद्र उवाच
संहारार्थं प्रसीदस्व मा रुषो वसुधाधिप।
मा प्रजा: स्थावराश्चैव जंगमाश्च व्यनीनश:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
रुद्र बोले- हे वसुधा के स्वामी पितामह! आप क्रोधित न हों। प्रसन्न होकर संसार का विनाश रोकें। इन स्थावर-जंगम प्राणियों का विनाश न करें।
 
Rudra said- O Lord of Vasudha, Grandfather! Do not be angry. Be happy to stop the destruction of the world. Do not destroy these mobile and immobile creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)