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mahabharat 7.53.22-23h: ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर मृत्यु नामक कमल पुष्प अत्यंत चिंतित हो गया और फूट-फूटकर रोने लगा। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.53.22-23h 
एवमुक्ता तु सा तेन मृत्यु: कमललोचना॥ २२॥
दध्यौ चात्यर्थमबला प्ररुरोद च सुस्वरम्।
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर मृत्यु नामक कमल पुष्प अत्यंत चिंतित हो गया और फूट-फूटकर रोने लगा। 22 1/2॥
 
When Lord Brahma said this, the lotus flower named Mrityu became very worried and started crying bitterly. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)