Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.53.2: आपकी वे सारी प्रजाएँ आपके क्रोध के कारण पुनः यहाँ दग्ध हो रही हैं। इससे मेरे हृदय में उनके प्रति करुणा उत्पन्न हो गई है। अतः हे प्रभु! हे प्रभु! उन प्रजाओं पर कृपा करके प्रसन्न होइए॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 7.53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आपकी वे सारी प्रजाएँ आपके क्रोध के कारण पुनः यहाँ दग्ध हो रही हैं। इससे मेरे हृदय में उनके प्रति करुणा उत्पन्न हो गई है। अतः हे प्रभु! हे प्रभु! उन प्रजाओं पर कृपा करके प्रसन्न होइए॥ 2॥
All those subjects of yours are being burnt here again due to your anger. This has filled my heart with compassion for them. Therefore, O Lord! O Lord! Please be pleased by casting your blessings upon those subjects.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥