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mahabharat 7.53.19: वे अपने होश खोकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ी हो गईं और उन दोनों देवताओं तथा जगत् के स्वामी भगवान् को देखकर मंद-मंद मुस्कुराने लगीं ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 7.53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.53.19 
सा नि:सृत्य तथा खेभ्यो दक्षिणां दिशमाश्रिता।
स्मयमाना च सावेक्ष्य देवौ विश्वेश्वरावुभौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वे अपने होश खोकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ी हो गईं और उन दोनों देवताओं तथा जगत् के स्वामी भगवान् को देखकर मंद-मंद मुस्कुराने लगीं ॥19॥
 
Coming out of their senses, she stood facing south and looking at those two gods and the Lord of the Universe, started smiling softly. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)