Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.52.45: हे मेरे पुत्र! मेरी अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति के योग्य! तुम मेरे मन के संकल्प से उत्पन्न हुए हो। मैं तुम्हारी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? हे मेरे मित्र! तुम जो कुछ चाहते हो, मुझे बताओ। मैं तुम्हारे सभी इच्छित कार्य करूँगा।॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 7.52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मेरे पुत्र! मेरी अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति के योग्य! तुम मेरे मन के संकल्प से उत्पन्न हुए हो। मैं तुम्हारी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? हे मेरे मित्र! तुम जो कुछ चाहते हो, मुझे बताओ। मैं तुम्हारे सभी इच्छित कार्य करूँगा।॥ 45॥
My son, worthy of achieving my desired desires! You are born from my mental resolve. Which desire of yours should I fulfill? O my friend! Tell me whatever you want. I will do all your desired tasks.'॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥