श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.52.44 
तस्मिन्नापतिते स्थाणौ प्रजानां हितकाम्यया।
अब्रवीत् परमो देवो ज्वलन्निव महामुनि:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान रुद्र लोकों के कल्याण की इच्छा से आये, तब उनके तेज से प्रकाशित हो रहे परात्पर भगवान महामुनि ब्रह्माजी इस प्रकार बोले- ॥44॥
 
When Lord Rudra came with the desire for the welfare of the people, Supreme God Mahamuni Brahmaji, glowing with his glory, spoke like this - ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)