Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.52.41-42: तत्पश्चात् आकाश और पृथ्वी पर सर्वत्र भयंकर अग्नि की लपटें फैल गईं। दाह करने में समर्थ और अत्यन्त शक्तिशाली भगवान अग्निदेव ने अपने महाक्रोध के वेग से समस्त चराचर जगत को दग्ध करके सबको पीड़ित करना आरम्भ कर दिया। इससे बहुत से चर-अचर प्राणी नष्ट हो गए। 41-42॥ | mahabharat अध्याय 7.52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् आकाश और पृथ्वी पर सर्वत्र भयंकर अग्नि की लपटें फैल गईं। दाह करने में समर्थ और अत्यन्त शक्तिशाली भगवान अग्निदेव ने अपने महाक्रोध के वेग से समस्त चराचर जगत को दग्ध करके सबको पीड़ित करना आरम्भ कर दिया। इससे बहुत से चर-अचर प्राणी नष्ट हो गए। 41-42॥
Thereafter, fierce flames of fire spread everywhere in the sky and the earth. Capable of burning and extremely powerful, Lord Agnidev, with the ferocity of his great anger, began to burn the entire living world, tormenting everyone. Due to this many living and movable creatures were destroyed. 41-42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥