श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.52.4 
बालश्च बालबुद्धिश्च सौभद्र: परवीरहा।
अनुपायेन संग्रामे युध्यमानो विशेषत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
शत्रुवीरों का संहार करने वाला अभिमन्यु अभी बालक ही था; उसकी बुद्धि बालकों जैसी थी। विशेषकर युद्ध में वह बिना उपयुक्त उपकरणों के ही युद्ध कर रहा था॥4॥
 
‘Abhimanyu, the slayer of enemy warriors, was still a child; he had the intelligence of a child. Especially in the war, he was fighting without the appropriate equipment.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)