श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.52.34 
मम पुत्रो महावीर्य इन्द्रविष्णुसमद्युति:।
शत्रुभिर्बहुभि: संख्ये पराक्रम्य हतो बली॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
(उसने कहा -) 'हे देवमुनि! मेरा पुत्र इन्द्र और विष्णु के समान तेजस्वी, पराक्रमी और शक्तिशाली था; किन्तु युद्ध में अनेक शत्रुओं ने मिलकर अपना पराक्रम दिखाकर उसे मार डाला।
 
(He said -) 'O sage of gods! My son was as illustrious, valiant and powerful as Indra and Vishnu; but in the war many enemies together displayed their might and killed him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)