श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.52.33 
तस्य सर्वं समाचष्ट यथावृत्तं नरेश्वर:।
शत्रुभिर्विजयं संख्ये पुत्रस्य च वधं तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजा ने धीरे-धीरे उन्हें शत्रुओं की विजय और युद्धभूमि में अपने पुत्र के मारे जाने का पूरा समाचार सुनाया।
 
The king gradually told them the entire news about the victory of the enemies and the killing of his son on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)