vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना
»
श्लोक 33
श्लोक
7.52.33
तस्य सर्वं समाचष्ट यथावृत्तं नरेश्वर:।
शत्रुभिर्विजयं संख्ये पुत्रस्य च वधं तथा॥ ३३॥
अनुवाद
राजा ने धीरे-धीरे उन्हें शत्रुओं की विजय और युद्धभूमि में अपने पुत्र के मारे जाने का पूरा समाचार सुनाया।
The king gradually told them the entire news about the victory of the enemies and the killing of his son on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×