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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.52.31 
तस्य शोकं विदित्वा तु पुत्रव्यसनसम्भवम्।
आजगामाथ देवर्षिर्नारदोऽस्य समीपत:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि राजा अकम्पन अपने पुत्र की मृत्यु से बहुत दुःखी हैं, नारद मुनि उनके पास आये।
 
Knowing that King Akampana was grieving greatly on the death of his son, the sage Narada came to him. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)