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mahabharat 7.52.3: ऋषिवर! पाप में लिप्त अनेक महान धनुर्धरों और योद्धाओं ने सुभद्रापुत्र अभिमन्यु को चारों ओर से घेरकर युद्धभूमि में असहाय अवस्था में ही उसका वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.52.3 
अधर्मयुक्तैर्बहुभि: परिवार्य महारथै:।
युध्यमानो महेष्वासै: सौभद्रो निहतो रणे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ऋषिवर! पाप में लिप्त अनेक महान धनुर्धरों और योद्धाओं ने सुभद्रापुत्र अभिमन्यु को चारों ओर से घेरकर युद्धभूमि में असहाय अवस्था में ही उसका वध कर दिया।
 
Sage! Many great archers and warriors, who were devoted to sin, surrounded Abhimanyu, the son of Subhadra, from all sides and killed him while he was helpless in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)