श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.52.22 
तदहं सम्प्रवक्ष्यामि मृत्यो: प्रभवमुत्तमम्।
ततस्त्वं मोक्ष्यसे दु:खात् स्नेहबन्धनसंश्रयात्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं तुम्हें मृत्यु की उत्पत्ति की सुन्दर कथा सुनाता हूँ; उसे सुनकर तुम स्नेह के बंधन से उत्पन्न होने वाले दुःख से मुक्त हो जाओगे ॥22॥
 
Therefore I will narrate to you the beautiful story of the origin of death; on hearing it you will be relieved from the sorrow caused by the bond of affection. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)