श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.52.14 
नैषां पश्यामि हन्तारं प्राणिनां संयुगे क्वचित्।
विक्रमेणोपसम्पन्नास्तपोबलसमन्विता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्ध में इन महाबली योद्धाओं को मारने वाला कोई नहीं देख सका, क्योंकि वे सभी वीरता से परिपूर्ण थे और तपस्या की शक्ति से संपन्न थे।
 
I could not see anyone who could kill these mighty warriors in the war, for all of them were full of valour and were endowed with the power of austerity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)