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mahabharat 7.52.11: भरतनंदन युधिष्ठिर! यह सृष्टिकर्ता का नियम है। इसका उल्लंघन कोई नहीं कर सकता। मृत्यु देवताओं, दानवों और गंधर्वों के भी प्राण हर लेती है।   |   mahabharat अध्याय 7.52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.52.11 
अनतिक्रमणीयो वै विधिरेष युधिष्ठिर।
देवदानवगन्धर्वान् मृत्युर्हरति भारत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन युधिष्ठिर! यह सृष्टिकर्ता का नियम है। इसका उल्लंघन कोई नहीं कर सकता। मृत्यु देवताओं, दानवों और गंधर्वों के भी प्राण हर लेती है।
 
Bharatanandan Yudhishthira! This is the law of the Creator. No one can violate it. Death takes away the lives of even the Gods, Demons and Gandharvas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)