श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 52: विलाप करते हुए युधिष्ठिरके पास व्यासजीका आगमन और अकम्पन-नारद-संवादकी प्रस्तावना करते हुए मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग आरम्भ करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.52.1 
संजय उवाच
अथैनं विलपन्तं तं कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
कृष्णद्वैपायनस्तत्र आजगाम महानृषि:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! कुंतीपुत्र युधिष्ठिर के शोक में महर्षि श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासजी वहाँ आये। 1॥
 
Sanjay says- Rajan! Maharshi Shri Krishnadvaipayan Vyasji came there mourning Kunti's son Yudhishthir. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)