Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.51.21: जिसके बल और पुरुषार्थ अद्वितीय थे, उस देवेन्द्रकुमार अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को युद्धभूमि में मारा गया देखकर अब विजय, राज्य, अमरता और स्वर्ग की प्राप्ति भी मुझे प्रसन्न नहीं कर सकती।’ 21॥ | mahabharat अध्याय 7.51: युधिष्ठिरका विलाप । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे जय: प्रीतिकरो न राज्यं
न चामरत्वं न सुरै: सलोकता।
इमं समीक्ष्याप्रतिवीर्यपौरुषं
निपातितं देववरात्मजात्मजम्॥ २१॥
अनुवाद
जिसके बल और पुरुषार्थ अद्वितीय थे, उस देवेन्द्रकुमार अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को युद्धभूमि में मारा गया देखकर अब विजय, राज्य, अमरता और स्वर्ग की प्राप्ति भी मुझे प्रसन्न नहीं कर सकती।’ 21॥
Seeing this Abhimanyu, the son of Devendrakumar Arjun, whose strength and efforts were unmatched, killed in the battlefield, now even victory, kingdom, immortality and attainment of heaven cannot make me happy.' 21॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि युधिष्ठिरप्रलापे एकपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें युधिष्ठिरप्रलापविषयक इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५१॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल २५ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥