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mahabharat 7.51.1-2: संजय कहते हैं - हे राजन! महारथी सुभद्रापुत्र अभिमन्यु के मारे जाने पर समस्त पाण्डव योद्धा अपने रथ और कवच त्यागकर, धनुष फेंककर, राजा युधिष्ठिर को चारों ओर से घेरकर उनके पास बैठ गए। उनके सारे मन सुभद्रापुत्र अभिमन्यु पर ही केन्द्रित थे और वे उसी युद्ध के विषय में सोच रहे थे।॥ 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 7.51: युधिष्ठिरका विलाप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 51: युधिष्ठिरका विलाप  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  7.51.1-2 
संजय उवाच
हते तस्मिन् महावीर्ये सौभद्रे रथयूथपे।
विमुक्तरथसंनाहा: सर्वे निक्षिप्तकार्मुका:॥ १॥
उपोपविष्टा राजानं परिवार्य युधिष्ठिरम्।
तदेव युद्धं ध्यायन्त: सौभद्रगतमानसा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! महारथी सुभद्रापुत्र अभिमन्यु के मारे जाने पर समस्त पाण्डव योद्धा अपने रथ और कवच त्यागकर, धनुष फेंककर, राजा युधिष्ठिर को चारों ओर से घेरकर उनके पास बैठ गए। उनके सारे मन सुभद्रापुत्र अभिमन्यु पर ही केन्द्रित थे और वे उसी युद्ध के विषय में सोच रहे थे।॥ 1-2॥
 
Sanjaya says - O King! After the death of the mighty charioteer Abhimanyu, son of Subhadra, all the Pandava warriors abandoned their chariots and armour, threw down their bows and surrounded King Yudhishthira from all sides and sat near him. All their minds were focused on Abhimanyu, son of Subhadra, and they were thinking about that very war.॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)