Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.50.13: वहाँ प्रेतों के ऐसे भयानक समूह खा-पी रहे थे और दहाड़ रहे थे। वे प्रेत, जो सब प्राणियों का नाश करते थे, बड़े प्रसन्न थे। कुत्ते, सियार और पक्षी भी समान रूप से भोजन पाते थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.50: तीसरे (तेरहवें) दिनके युद्धकी समाप्तिपर सेनाका शिविरको प्रस्थान एवं रणभूमिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 50: तीसरे (तेरहवें) दिनके युद्धकी समाप्तिपर सेनाका शिविरको प्रस्थान एवं रणभूमिका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.50.13 
पिबन्ति चाश्नन्ति च यत्र दुर्दृशा:
पिशाचसंघास्तु नदन्ति भैरवा:।
सुनन्दिता: प्राणभृतां क्षयङ्करा:
समानभक्षा: श्वशृगालपक्षिण:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ प्रेतों के ऐसे भयानक समूह खा-पी रहे थे और दहाड़ रहे थे। वे प्रेत, जो सब प्राणियों का नाश करते थे, बड़े प्रसन्न थे। कुत्ते, सियार और पक्षी भी समान रूप से भोजन पाते थे॥13॥
 
Such terrifying groups of ghosts, who were difficult to even look at, were eating, drinking and roaring there. Those ghosts, who destroyed all living beings, were very happy. Dogs, jackals and birds also got food equally.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)