श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  7.5.5-6 
दुर्योधन उवाच
भीष्म: सेनाप्रणेताऽऽसीद् वयसा विक्रमेण च।
श्रुतेन चोपसम्पन्न: सर्वैर्योधगणैस्तथा॥ ५॥
तेनातियशसा कर्ण घ्नता शत्रुगणान् मम।
सुयुद्धेन दशाहानि पालिता: स्मो महात्मना॥ ६॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- कर्ण! पहले हमारे सेनापति भीष्म पितामह थे, जो आयु, बल और विद्या में सबसे श्रेष्ठ थे। वे ही यशस्वी पितामह समस्त योद्धाओं के साथ दस दिनों से हमारी रक्षा करते हुए उत्तम युद्धनीति से मेरे शत्रुओं का संहार कर रहे हैं।
 
Duryodhan said- Karna! Earlier, our commander was Bhishma, the grandfather who was the greatest in age, strength and knowledge. That very famous grandfather, along with all the warriors, has been protecting us for ten days, killing my enemies with the best warfare technique. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)