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mahabharat 7.5.2: कर्ण! यह सेना तुम्हारे द्वारा रक्षित है, अतः मैं इसे रक्षित ही मानता हूँ। अब तुम निश्चय करो कि यहाँ हमारे लिए क्या करना हितकर और लाभदायक है।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.5.2 
सनाथमिव मन्येऽहं भवता पालितं बलम्।
अत्र किं नु समर्थं यद्धितं तत् सम्प्रधार्यताम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! यह सेना तुम्हारे द्वारा रक्षित है, अतः मैं इसे रक्षित ही मानता हूँ। अब तुम निश्चय करो कि यहाँ हमारे लिए क्या करना हितकर और लाभदायक है।॥2॥
 
Karna! This army is being protected by you, so I consider it as if it is protected. Now decide what is useful and beneficial for us to do here.'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)