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mahabharat 7.5.18: समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ और अजेय योद्धा द्रोणाचार्य के समक्ष शुक्राचार्य और बृहस्पति जैसे महापुरुषों के अतिरिक्त और कौन सेनापति हो सकता था?॥18॥   |   mahabharat अध्याय 7.5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.5.18 
को हि तिष्ठति दुर्धर्षे द्रोणे शस्त्रभृतां वरे।
सेनापति: स्यादन्योऽस्माच्छुक्राङ्गिरसदर्शनात्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ और अजेय योद्धा द्रोणाचार्य के समक्ष शुक्राचार्य और बृहस्पति जैसे महापुरुषों के अतिरिक्त और कौन सेनापति हो सकता था?॥18॥
 
In the presence of Dronacharya, the best among all weapon bearers and the invincible warrior, who else could be the commander-in-chief except great men like Shukracharya and Brihaspati?॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)