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mahabharat 7.5.16: परंतु ये सब राजा एक-दूसरे के प्रतिद्वन्द्वी हैं। यदि आप इनमें से किसी एक को सेनापति बना देंगे, तो अन्य सब मन ही मन दुखी होंगे और आपके हित के लिए युद्ध नहीं करेंगे, यह बात स्पष्ट है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 7.5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.5.16 
अन्योन्यस्पर्धिनां ह्येषां यद्येकं यं करिष्यसि।
शेषा विमनसो व्यक्तं न योत्स्यन्ति हितास्तव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
परंतु ये सब राजा एक-दूसरे के प्रतिद्वन्द्वी हैं। यदि आप इनमें से किसी एक को सेनापति बना देंगे, तो अन्य सब मन ही मन दुखी होंगे और आपके हित के लिए युद्ध नहीं करेंगे, यह बात स्पष्ट है॥16॥
 
But all these kings are competitors of each other. If you make any one of them the commander, then all the others will be unhappy in their hearts and will not fight for your benefit, this is very clear.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)