श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.5.14 
कुलसंहननज्ञानैर्बलविक्रमबुद्धिभि:।
युक्ता: श्रुतज्ञा धीमन्त आहवेष्वनिवर्तिन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यहाँ उपस्थित सभी राजागण अपने वंश, शरीर, विद्या, बल, पराक्रम और बुद्धि की दृष्टि से सेनापति पद के योग्य हैं। वे सभी वेदों के ज्ञाता, बुद्धिमान और युद्ध से कभी पीछे न हटने वाले हैं॥14॥
 
All the kings present here are worthy of the position of commander in chief in terms of their lineage, physique, knowledge, strength, valour and wisdom. All of them are experts in Vedas, intelligent and never retreat from a battle.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)