Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.49.8-9h: इसके बाद उसने दस वसत्य रथियों को मार डाला। केकयों के सात रथियों और दस हाथियों को मारकर उसने अपनी गदा के प्रहार से दु:शासन के पुत्र के रथ को उसके घोड़ों सहित तोड़ डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.49.8-9h 
पुनश्चैव वसातीयाञ्जघान रथिनो दश।
केकयानां रथान् सप्त हत्वा च दश कुञ्जरान्॥ ८॥
दौ:शासनिरथं साश्वं गदया समपोथयत्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद उसने दस वसत्य रथियों को मार डाला। केकयों के सात रथियों और दस हाथियों को मारकर उसने अपनी गदा के प्रहार से दु:शासन के पुत्र के रथ को उसके घोड़ों सहित तोड़ डाला।
 
After this he killed ten Vasatiya charioteers. After killing seven chariots of the Kekayas and ten elephants, he also smashed the chariot of Dushasan's son along with his horses with the blow of his mace. 8 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)