Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.49.39: हजारों रथों, घोड़ों, पैदलों और हाथियों को मारकर भी वह युद्ध से संतुष्ट नहीं हुआ। अपने पुण्य कर्मों के कारण अभिमन्यु शोक करने योग्य नहीं है। वह पुण्यात्माओं के पुण्यों से अर्जित सनातन लोकों को प्राप्त हुआ है॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.49.39 
रथाश्वनरमातङ्गान् विनिहत्य सहस्रश:।
अवितृप्त: स संग्रामादशोच्य: पुण्यकर्मकृत्।
गत: पुण्यकृतां लोकान् शाश्वतान् पुण्यनिर्जितान्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हजारों रथों, घोड़ों, पैदलों और हाथियों को मारकर भी वह युद्ध से संतुष्ट नहीं हुआ। अपने पुण्य कर्मों के कारण अभिमन्यु शोक करने योग्य नहीं है। वह पुण्यात्माओं के पुण्यों से अर्जित सनातन लोकों को प्राप्त हुआ है॥ 39॥
 
Even after killing thousands of chariots, horses, infantry and elephants, he was not satisfied with the war. Because of his pious deeds, Abhimanyu is not worthy of mourning. He has reached the eternal worlds of pious souls earned through their merits.॥ 39॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि अभिमन्युवधे एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें अभिमन्युवधविषयक उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)