Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.49.36: परम तेजस्वी और तेजस्वी योद्धा धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने दुःखी सैनिकों से ऐसा कहकर उनका शोक दूर किया ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.49.36 
इत्येवं स महातेजा दु:खितेभ्यो महाद्युति:।
धर्मराजो युधां श्रेष्ठो ब्रुवन् दु:खमपानुदत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
परम तेजस्वी और तेजस्वी योद्धा धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने दुःखी सैनिकों से ऐसा कहकर उनका शोक दूर किया ॥36॥
 
Dharmaraja Yudhishthira, the most brilliant and most radiant warrior, relieved his sorrow by saying this to his distressed soldiers. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)