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mahabharat 7.49.35: यह वीर अभिमन्यु, जिसने युद्ध में प्राणों की बाजी लगाकर भी पीठ नहीं दिखाई, निश्चय ही स्वर्गलोक को गया है। तुम सब लोग धैर्य रखो। डरो मत। हम युद्धभूमि में शत्रुओं को अवश्य परास्त करेंगे।॥35॥   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.49.35 
स्वर्गमेष गत: शूरो यो हतो न पराङ्मुख:।
संस्तम्भयत मा भैष्ट विजेष्यामो रणे रिपून्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यह वीर अभिमन्यु, जिसने युद्ध में प्राणों की बाजी लगाकर भी पीठ नहीं दिखाई, निश्चय ही स्वर्गलोक को गया है। तुम सब लोग धैर्य रखो। डरो मत। हम युद्धभूमि में शत्रुओं को अवश्य परास्त करेंगे।॥35॥
 
This valiant Abhimanyu who risked his life but could not turn his back in the battle has certainly gone to heaven. All of you be patient. Do not be afraid. We will certainly defeat the enemies in the battle-field.'॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)