Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.49.29-31: वे बड़े-बड़े हाथी अपने अंकुशों, महावतों, कवचों, अस्त्र-शस्त्रों और ध्वजाओं सहित बाणों से मथे हुए पर्वतों के समान शोभा पा रहे थे। जिन लोगों ने उन बड़े-बड़े हाथियों को मार डाला था, वे अपने श्रेष्ठ रथों, घोड़ों, सारथिओं और योद्धाओं से रहित होकर मथे हुए सरोवरों के समान भूमि पर बिखर गए थे। नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों और अलंकारों से सुसज्जित पैदल सैनिकों के समूह भी उस युद्ध में मारे गए थे। इस सब के कारण वहाँ की भूमि अत्यंत भयानक हो गई थी और डरपोकों के हृदय में भय उत्पन्न कर रही थी॥29-31॥ | mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे बड़े-बड़े हाथी अपने अंकुशों, महावतों, कवचों, अस्त्र-शस्त्रों और ध्वजाओं सहित बाणों से मथे हुए पर्वतों के समान शोभा पा रहे थे। जिन लोगों ने उन बड़े-बड़े हाथियों को मार डाला था, वे अपने श्रेष्ठ रथों, घोड़ों, सारथिओं और योद्धाओं से रहित होकर मथे हुए सरोवरों के समान भूमि पर बिखर गए थे। नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों और अलंकारों से सुसज्जित पैदल सैनिकों के समूह भी उस युद्ध में मारे गए थे। इस सब के कारण वहाँ की भूमि अत्यंत भयानक हो गई थी और डरपोकों के हृदय में भय उत्पन्न कर रही थी॥29-31॥
The big elephants, along with their goads, mahouts, armour, weapons and flags, looked like mountains churned by arrows. Those who had killed the big elephants, were scattered on the ground like churned lakes, devoid of their best chariots, horses, charioteers and warriors. Groups of foot soldiers, equipped with various types of weapons and ornaments, were also killed in that war. Due to all this, the land there had become extremely terrifying and instilled fear in the hearts of timid men.॥29-31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥