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mahabharat 7.49.15: जैसे हाथी कभी-कभी सरोवर को मथ डालता है, उसी प्रकार सारी सेना को क्षुब्ध करके वीर अभिमन्यु वहाँ अत्यन्त शोभायमान होकर जंगली हाथी के समान शिकारियों द्वारा मारा गया।   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.49.15 
क्षोभयित्वा चमूं सर्वां नलिनीमिव कुञ्जर:।
अशोभत हतो वीरो व्याधैर्वनगजो यथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे हाथी कभी-कभी सरोवर को मथ डालता है, उसी प्रकार सारी सेना को क्षुब्ध करके वीर अभिमन्यु वहाँ अत्यन्त शोभायमान होकर जंगली हाथी के समान शिकारियों द्वारा मारा गया।
 
Just as an elephant sometimes churns up a lake, similarly, after disturbing the entire army, the brave Abhimanyu was killed by hunters like a wild elephant, looking extremely splendid there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)