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mahabharat 7.49.12-13h: तत्पश्चात् कुरुकुल का यश बढ़ाने वाले दु:शासन के पुत्र ने उठकर सबसे पहले अपनी गदा से सुभद्राकुमार के सिर पर प्रहार किया। 12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.49.12-13h 
दौ:शासनिरथोत्थाय कुरूणां कीर्तिवर्धन:॥ १२॥
उत्तिष्ठमानं सौभद्रं गदया मूर्ध्न्यताडयत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुरुकुल का यश बढ़ाने वाले दु:शासन के पुत्र ने उठकर सबसे पहले अपनी गदा से सुभद्राकुमार के सिर पर प्रहार किया। 12 1/2॥
 
After that, Dushasan's son, who had increased the fame of Kurukula, first got up and struck the head of Subhadrakumar with his mace. 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)