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mahabharat 7.49.10-11h: वे दोनों वीर एक-दूसरे के शत्रु थे। अतः वे गदाएँ हाथ में लेकर एक-दूसरे को मार डालने के इरादे से एक-दूसरे पर आक्रमण करने लगे। ठीक वैसे ही जैसे पूर्वकाल में भगवान शंकर और अंधकासुर एक-दूसरे पर गदाओं से आक्रमण करते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 49: अभिमन्युका कालिकेय, वसाति और कैकय रथियोंको मार डालना एवं छ: महारथियोंके सहयोगसे अभिमन्युका वध और भागती हुई अपनी सेनाको युधिष्ठिरका आश्वासन देना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.49.10-11h 
तावुद्यतगदौ वीरावन्योन्यवधकाङ्क्षिणौ॥ १०॥
भ्रातृव्यौ सम्प्रजह्राते पुरेव त्र्यम्बकान्धकौ।
 
 
अनुवाद
वे दोनों वीर एक-दूसरे के शत्रु थे। अतः वे गदाएँ हाथ में लेकर एक-दूसरे को मार डालने के इरादे से एक-दूसरे पर आक्रमण करने लगे। ठीक वैसे ही जैसे पूर्वकाल में भगवान शंकर और अंधकासुर एक-दूसरे पर गदाओं से आक्रमण करते थे।
 
Both those brave men were enemies of each other. So, taking maces in their hands, they started attacking each other with the intention of killing each other. Just like in the past, Lord Shankar and Andhakasur used to attack each other with maces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)