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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.48.6 
तथेतरान् महेष्वासान् दशभिर्दशभि: शरै:।
प्रत्यविध्यदसम्भ्रान्तस्तदद्भुतमिवाभवत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, बिना किसी डर के उसने दूसरे महान धनुर्धरों को दस-दस बाणों से घायल कर दिया। यह एक अद्भुत बात थी।
 
Not only this, without any fear he injured other great archers with ten arrows each. That was an amazing thing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)