Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.48.41: अभिमन्यु के वस्त्र उसके शरीर से बहते हुए रक्त के रंग से सने हुए थे। उसकी भौंहें टेढ़ी होने के कारण उसका मुख सब ओर से टेढ़ा दिखाई दे रहा था और वह जोर से गर्जना कर रहा था। ऐसी अवस्था में वह प्रभावशाली और असीम पराक्रमी अभिमन्यु उस रणभूमि में पूर्वोक्त राजाओं के बीच में खड़ा हुआ अत्यन्त शोभायमान दिख रहा था। ॥41॥ | mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अभिमन्यु के वस्त्र उसके शरीर से बहते हुए रक्त के रंग से सने हुए थे। उसकी भौंहें टेढ़ी होने के कारण उसका मुख सब ओर से टेढ़ा दिखाई दे रहा था और वह जोर से गर्जना कर रहा था। ऐसी अवस्था में वह प्रभावशाली और असीम पराक्रमी अभिमन्यु उस रणभूमि में पूर्वोक्त राजाओं के बीच में खड़ा हुआ अत्यन्त शोभायमान दिख रहा था। ॥41॥
Abhimanyu's clothes were stained with the colour of the only blood flowing from his body. His face appeared crooked from all sides due to his crooked eyebrows and he was roaring loudly. In such a state, the impressive and infinitely powerful Abhimanyu was standing in the midst of the aforementioned kings in that battlefield and was looking very prominent. ॥ 41॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि अभिमन्युविरथकरणे अष्टचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें अभिमन्युको रथहीन करनेसे सम्बन्ध रखनेवाला अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४१ १/२ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥