Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.48.38-39: राधानन्दन कर्ण ने अपने तीखे बाणों से उसकी उत्तम ढाल को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। ढाल और तलवार से रहित होकर अभिमन्यु बाणों से पूर्ण शरीर वाला होकर पुनः आकाश से पृथ्वी पर उतर आया और हाथ में चक्र लेकर क्रोधपूर्वक द्रोणाचार्य की ओर दौड़ा। | mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राधानन्दन कर्ण ने अपने तीखे बाणों से उसकी उत्तम ढाल को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। ढाल और तलवार से रहित होकर अभिमन्यु बाणों से पूर्ण शरीर वाला होकर पुनः आकाश से पृथ्वी पर उतर आया और हाथ में चक्र लेकर क्रोधपूर्वक द्रोणाचार्य की ओर दौड़ा।
Radhanandan Karna with his sharp arrows broke his excellent shield into pieces. Being deprived of shield and sword, Abhimanyu with his body full of arrows again came down from the sky to the earth and with discus in his hand ran towards Dronacharya in anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥