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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.48.34-35h 
स च्छिन्नधन्वा विरथ: स्वधर्ममनुपालयन्॥ ३४॥
खड्गचर्मधर: श्रीमानुत्पपात विहायसा।
 
 
अनुवाद
जब उसका धनुष कट गया और उसका रथ नष्ट हो गया, तब महारथी योद्धा अभिमन्यु अपने कर्तव्य का पालन करते हुए, ढाल और तलवार हाथ में लेकर आकाश में कूद पड़ा।
 
When his bow was cut and his chariot was destroyed, the illustrious warrior Abhimanyu, obeying his duty, jumped into the sky with his shield and sword in his hands. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)