Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.48.3-d1h: तब अभिमन्यु ने क्रोध में भरकर कर्ण को अपने बाणों से घायल करके उसे बहुत अधिक रक्त से लथपथ कर दिया। उस समय बाणों से घायल और रक्त से लथपथ वीर कर्ण अत्यंत शोभायमान हो रहा था, मानो संध्या के समय शरद ऋतु का सूर्य पूर्णतः लाल दिखाई दे रहा हो। | mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब अभिमन्यु ने क्रोध में भरकर कर्ण को अपने बाणों से घायल करके उसे बहुत अधिक रक्त से लथपथ कर दिया। उस समय बाणों से घायल और रक्त से लथपथ वीर कर्ण अत्यंत शोभायमान हो रहा था, मानो संध्या के समय शरद ऋतु का सूर्य पूर्णतः लाल दिखाई दे रहा हो।
Then Abhimanyu, filled with anger, wounded Karna with his arrows and made him bleed profusely. At that time, the valiant Karna, torn by arrows and soaked in blood, looked very beautiful, as if the autumn sun was appearing completely red at dusk.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥