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mahabharat 7.48.27-28: कर्ण! अभिमन्यु का कवच अभेद्य है। यह युवा योद्धा शीघ्र ही अपना पराक्रम दिखाएगा। मैंने इसके पिता को कवच धारण करने की विधि बता दी है। शत्रु नगर पर विजय प्राप्त करने वाला यह वीर पुत्र निश्चय ही समस्त विधियों को जानता है (अतः इसका कवच अभेद्य है); किन्तु एकाग्रचित्त होकर छोड़े गए बाणों से इसका धनुष और प्रत्यंचा कट सकती है॥ 27-28॥   |   mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  7.48.27-28 
अभेद्यमस्य कवचं युवा चाशुपराक्रम:।
उपदिष्टा मया चास्य पितु: कवचधारणा॥ २७॥
तामेष निखिलां वेत्ति ध्रुवं परपुरंजय:।
शक्यं त्वस्य धनुश्छेत्तुं ज्यां च बाणै: समाहितै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! अभिमन्यु का कवच अभेद्य है। यह युवा योद्धा शीघ्र ही अपना पराक्रम दिखाएगा। मैंने इसके पिता को कवच धारण करने की विधि बता दी है। शत्रु नगर पर विजय प्राप्त करने वाला यह वीर पुत्र निश्चय ही समस्त विधियों को जानता है (अतः इसका कवच अभेद्य है); किन्तु एकाग्रचित्त होकर छोड़े गए बाणों से इसका धनुष और प्रत्यंचा कट सकती है॥ 27-28॥
 
Karna! Abhimanyu's armour is impenetrable. This young warrior will soon display his valour. I have told his father the method of wearing the armour. This brave son who will conquer the enemy city surely knows all the methods (hence his armour is impenetrable); but his bow and string can be cut by arrows shot with full concentration.॥ 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)