Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.48.25-26: ‘अग्नि के समान तेजस्वी अभिमन्युपुत्र के ये भयंकर एवं भयंकर बाण आज मेरी छाती में चुभ गए हैं।’ यह सुनकर द्रोणाचार्य जोर से हँसे और धीरे-धीरे कर्ण से इस प्रकार बोले-॥25-26॥ | mahabharat अध्याय 7.48: अभिमन्युद्वारा अश्वकेतु, भोज और कर्णके मन्त्री आदिका वध एवं छ: महारथियोंके साथ घोर युद्ध और उन महारथियोंद्वारा अभिमन्युके धनुष, रथ, ढाल और तलवारका नाश । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘अग्नि के समान तेजस्वी अभिमन्युपुत्र के ये भयंकर एवं भयंकर बाण आज मेरी छाती में चुभ गए हैं।’ यह सुनकर द्रोणाचार्य जोर से हँसे और धीरे-धीरे कर्ण से इस प्रकार बोले-॥25-26॥
"These fierce and fierce arrows of the radiant son of Abhimanyu, shining like fire, have pierced my chest today." Hearing this, Dronacharya laughed loudly and slowly spoke to Karna as follows -॥ 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥